Why speak softly क्यों दूसरों से मधुर बोले

Why speak softly क्यों मधुर बोले:
विनम्र और शिष्टाचार करने वाले सभी के लिए प्रिय होते है और अपने आचरण से अपनी तरफ सबका ध्यान आकर्षित करते है. साधारण से साधारण व्यक्ति मीठा बोलकर अर्थात मधुर वाणी बोलकर एक महान और सफल व्यक्ति बन सकता है जो लोग मीठा नहीं बोलते और जिनके अन्दर शिष्टाचार और विनम्रता की कमी होती है वो लोगो से दुश्मनी बढाते है और सफल नहीं हो पाते.

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एक गाँव में एक किसान रहता था उसका परिवार बड़ा था उसके चार बेटे थे वो हमेशा अपने बेटो को उनके बचपन से ही अपने पड़ोस, अपने रिश्तेदारो की कमिया बताया करता था कभी किसी की तारीफ नहीं करता था. बच्चों की आदत धीरे धीरे दुसरो की कमियां देखने की हो गई और वो भी सबकी कमियां देखने लगे और बड़े होने पर उन्होंने अपने माँ-बाप की कमियां उनको बतानी शुरु कर दी. क्योकि उनके पिता ने उनको दुसरो की कमियों देखने की आदत उनमे दाल दी.

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कई बार आपस में एक दुसरे पर व्यंग कसते रहते है और सोचते है की हमारे बारे में कोई बुरा न बोले. और फिर जब हम पर कोई व्यंग करता है तो हम बौखला जाते है और उत्तेजित होकर उससे बहस करने लगते है. फिर किसी और बात पर गुस्सा हो जाते है और बेवजह एक चक्रव्युह में फंस जाते है.

यदि चुपचाप धीरे से मुस्कुराकर व्यंग सह लेते और अपने काम से काम रखते. शांति से मुस्कुराना और चुप रहना भी एक कला है. हमेशा हमें बोलने के साथ-साथ चुप रहकर सुनने की आदत भी डालनी चाहिए. जो अपनी जुबान को काबू में रख रासकता है वही अपने आँख कान का सही प्रयोग कर सकता है. जरा सी उलटी बात कह देने से बात का बतंगड़ बन जाता है. अक्सर देखा है की कडवे और कटीले वचन ही बहुत सारे झगड़ो का कारण है.

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“बाण से हुए घाव भरना आसन है परन्तु वाणी से हुए घाव भरना बहुत मुश्किल है.”

Quotes on why speak softly मधुर वाणी के दोहे


संत कबीरदास ने कहा है:

दोस पराई देखि करी, चला हसंत हसंत,
अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत |

अर्थ: कबीर दास जी के इस दोहे से तात्पर्य यह है की दुसरो के दोष देखकर हँसना बहुत आसन है लेकिन अपने दोष हम कभी नहीं देखते जिनका कोई आदि और अंत नहीं है मतलब वो अनंत है.


तुलसीदास जी ने कहा है:

तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुँ ओर,
बसिकरन इक मंत्र है परिहरु बचन कठोर|

इसका अर्थ यह है की मीठे वचन सब ओर सुख फैलाते है. मीठे वचनों से किसी को भी वस् में किया जा सकता है. इसलिए मानव को चाहिए कठोर वचन त्यागकर मीठा वचन बोले.

कई लोग बहुत खरी, असंतुलित और गली गलौज वाली भाषा बोलने के आदि होते है और ऐसे लोगों से लोग दूर ही रहना चाहते है. वाणी द्वारा संयम रखकर बोलने वाला व्यक्ति समाज द्वारा सम्मानित होता है. सब लोग उससे बोलने को उत्सुक रहते है.

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2 Comments

  • नये साल के शुभ अवसर पर आपको और सभी पाठको को नए साल की कोटि-कोटि शुभकामनायें और बधाईयां। Nice Post ….. Thank you so much!! 🙂 🙂

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